शुक्रवार, जून 05, 2015
प्रदूषण का महाकाल
मंगलवार, मई 26, 2015
एक विचार
आज भारत को विकास की जरूरत है। वर्तमान व भावी पीढ़ी का मार्गदर्शन करना है तो उन्हें समझाना होगा ,उनकी चिंतन शक्ति ,आत्मबल ,राष्ट्र प्रेम को बढ़ाना होगा। आज हमारे प्रधानमंत्री भाई नरेन्द्र मोदी जी विकास के लिए विदेशों में जाकर भारत माता को फिर से स्वर्ण की प्रतिमा में बदलने की कोशिश कर रहे हें। तब हमारे देश के कुछ नेता धर्म के नाम पर विवादित भाषण देकर आपस में मतभेद पैदा कर रहें है।
सोमवार, मार्च 16, 2015
धर्म, आस्था और नियम
सोमवार, मार्च 02, 2015
प्रेम सुधारस बरसा दो
आप सभी लोगों को होली की मुबारक होली मंगलमय शुभ ,प्रगतिमय हो
होली की पावन बेला
में
रंग होली खूब मनाओ
एक दूजे के रंग में रंग जाओ
प्रेम भाव मधुरस बरसाओ।
आज डुबो दो मन का प्याला
भर लो गागर प्यार की
स्नेह सुधा रस बरसा दो
कर दो रंगों की फुहार।
रंग बसन्ती ,मन बसन्ती
उड़ाओ अबीर गुलाल
सतरंगी रंगों से भर लो
मन की गागर
छलका दो अनुराग
नारी का पत
पुरुष की पाग
एक दूजे के रंग में
रंग में रंग दो
हृदय से हृदय के
तारों को जोड़ो.
वाणी को वीणा से कर दो
झंकार
होली की इस पवन बेला
में
प्रेम सुधारस बरसा दो
तरु -तरु में पल्लव
आते
लता-लता कुसमित होती
धरा सुनहरी लगती
फागुन
नव यौवन ऐसे बरसे
जैसे मधुर फाग।
अवनि अंबर सब
मधुमय करदो
प्रेम सुधारस बरसाओ
होली की पावन बेला
में
रंग होली खूब मनाओ
ढोल बाजे ,मजीरा बाजे
बाजे शहनाई।
नर -नारी सब होली
खेले
बाजे मधुर मृदंग
मन से मन का मिलन हो
जीवन से जीवन जुड़ जाए
वाणी से सुर निकले वीणा के
ऐसे फागुन में फाग बरसे
हो जाए सब मधुलीन
उषा काल की सुनहरी विभा
संध्या की नभ लालिमा
पूणिमा की चाँदनी में
करो प्रगट मन के उद्गार
पिया मिलन की आस में
प्रेम सुमन रस बरसाओ
आज डुबो दो मन का प्याला
भर लो गागर प्यार की
जीवन के कण -कण को
मधुरस से मधुमय करदो
प्रेम सुधारस बरसा दो
होली की पावन बेला में
रंग होली खूब मनाओ.
रविवार, फ़रवरी 15, 2015
व्यवस्था को बदलना होगा
गुरुवार, जनवरी 01, 2015
मैं समय हूँ
मंगलवार, दिसंबर 30, 2014
नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं
उषा का आगमन हो
यामिनी जाती रहे
पृथ्वी बसन्त मनाती रहे
प्रति पल ,प्रति प्रहर ,
प्रति दिवस ,प्रति मास
सुखद परिवर्तन हो
प्रेम स्नेह ,प्यार
पारिजात पुष्प समूह
से सुवासित हो
अवसाद का नाम न हो
आनन्द का उन्माद हो
नव वर्ष ऐसा हो
इन्ही भावनाओं के साथ आप सभी लोगों नव वर्ष मुबारक हो .
शनिवार, दिसंबर 06, 2014
शुक्रवार, नवंबर 14, 2014
मंगलवार, नवंबर 11, 2014
कफ़न की जेब नहीं होती
सुनो मेरे दोस्तो
कफ़न की जेब नहीं होती
कब तक भागोगे
कहां ले जाओगे
कब तक लूटोगे
सब कुछ धरा रह जायेगा
कुछ भी साथ न जायेगा
जिन्दगी छोटी होती है
याद रखो
कफ़न की जेब नहीं होती
कब तक स्विस बैंक भरोगे
कब तक घोटाले करोगे
कब तक सीमाएं लांघोगे
जब हवा ही स्वच्छ न होगी
जी के क्या करोगे
जिंदगी छोटी होती है
याद रखो
कफ़न की जेब नही होती
नीला अंबर ही नीला न होगा
हवा में सुगन्ध ही न होगी
जल ही निर्मल न होगा
तब बैंक का क्या होगा
मत अभिशाप बनो
आने वाली पीढ़ी के लिए
जिंदगी छोटी होती है
याद रखो
कफ़न की जेब नही होती
क्षणिक सुख के लिए
कामना की प्रचण्ड अग्नि को
मत प्रज्वलित करो
देव भूमि को मत
मरुभूमि में बदलो
अंधकार से बाहर निकलो
जीवन की परिभाषा जानो
जिंदगी छोटी होती है
याद रखो
कफ़न की जेब नही होती
कब तक संकल्पों के
विकल्पों को ढूंढोगे
स्वच्छ आकाश ,निर्मल जल
सुगंधित हवा
देकर जाओ आने वाली पीढ़ी को
स्विस बैंक नहीं
सब कुछ धरा रह जायेगा
कुछ भी साथ न जायेगा
जिंदगी छोटी होती है
याद रखो
कफ़न की जेब नही होती.
सुनो मेरे दोस्तो
कफ़न की जेब नहीं होती
कब तक भागोगे
कहां ले जाओगे
कब तक लूटोगे
सब कुछ धरा रह जायेगा
कुछ भी साथ न जायेगा
जिन्दगी छोटी होती है
याद रखो
कफ़न की जेब नहीं होती
कब तक स्विस बैंक भरोगे
कब तक घोटाले करोगे
कब तक सीमाएं लांघोगे
जब हवा ही स्वच्छ न होगी
जी के क्या करोगे
जिंदगी छोटी होती है
याद रखो
कफ़न की जेब नही होती
नीला अंबर ही नीला न होगा
हवा में सुगन्ध ही न होगी
जल ही निर्मल न होगा
तब बैंक का क्या होगा
मत अभिशाप बनो
आने वाली पीढ़ी के लिए
जिंदगी छोटी होती है
याद रखो
कफ़न की जेब नही होती
क्षणिक सुख के लिए
कामना की प्रचण्ड अग्नि को
मत प्रज्वलित करो
देव भूमि को मत
मरुभूमि में बदलो
अंधकार से बाहर निकलो
जीवन की परिभाषा जानो
जिंदगी छोटी होती है
याद रखो
कफ़न की जेब नही होती
कब तक संकल्पों के
विकल्पों को ढूंढोगे
स्वच्छ आकाश ,निर्मल जल
सुगंधित हवा
देकर जाओ आने वाली पीढ़ी को
स्विस बैंक नहीं
सब कुछ धरा रह जायेगा
कुछ भी साथ न जायेगा
जिंदगी छोटी होती है
याद रखो
कफ़न की जेब नही होती.