आज भारत को विकास की जरूरत है। वर्तमान व भावी पीढ़ी का मार्गदर्शन करना है तो उन्हें समझाना होगा ,उनकी चिंतन शक्ति ,आत्मबल ,राष्ट्र प्रेम को बढ़ाना होगा। आज हमारे प्रधानमंत्री भाई नरेन्द्र मोदी जी विकास के लिए विदेशों में जाकर भारत माता को फिर से स्वर्ण की प्रतिमा में बदलने की कोशिश कर रहे हें। तब हमारे देश के कुछ नेता धर्म के नाम पर विवादित भाषण देकर आपस में मतभेद पैदा कर रहें है।
विकास में रुकावट डाल रहे
है। कमी धर्म की नहीं है कमी शिक्षा की है। इतना समय बेकार की बातों में लगाने से
तो दूर दराज गावों -स्लम एरिया में जाकर उनको पढ़ाए हम तो ऐसे देश की संतान है जहाँ
आध्यात्मिकता का प्रवाह बहा ,पहले
तत्व ज्ञान ने अपनी विकास भूमि बनाई ,जहाँ पर संसार के सर्वश्रेष्ठ ऋषियों की चरण रज पड़ चुकीं यहीं पर
धर्म और दर्शन के आदर्शो ने अपनी चरम उन्नति प्राप्त की थी यह वही भूमि है जिसने
शताब्दियों से विदेशियों के आक्रमण ,सैकड़ों कष्ट सहकर भी अक्षय बना हुआ है जहाँ पर जीवन पर्वत की तरह
दृढ़ भाव से खड़ा है जहाँ पर विवेकानंद जैसे वीर संन्यासी ने जन्म लिया जिन्होंने
तीन दिवस तक इस देश के अंतिम छोर कन्याकुमारी में समुद्र के बीच शिलाखंड में बैठकर
भारत माता का चिंतन किया स्वामी जी भारत से प्रेम करते थे क्योंकि भारत भूमि
धर्मभूमि ,कर्मभूमि
,और यज्ञ
भूमि है संन्यासी बनना है तो स्वामी विवेकानंद की तरह बनो धर्म को लेकर राष्ट्र
विरोधी बातें कर युवाओं को मत भटकाओ उन्हें अपनी मातृभूमि के प्रति प्यार प्रेम और
जीवन समर्पित करने की प्रेरणा देनी चाहिए.
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