शनिवार, सितंबर 13, 2014

                                                     जन्नत पर कहर। 

                   कश्मीर में कुदरत  का कहर चारों ओर पानी  ही पानी जल का महा प्रलय। सड़कें झील में बदल गई जिन्दगी थम गई। बच्चे से बूढ़े तक सब दर्द से भरे घर उजड़े लोग बिछुड़े इंसान बेबस हो गया इस सैलाब ने कश्मीर में हा हा कार मचा दिया क्याये  कुदरत की चेतावनी है या आक्रोश या उस का क्रंदन एक साल पहले जल का महाप्रलय केदारनाथ में हुआ कुदरत ऐसा क्यों कर रही है ?हम को कुदरत बार _बार तांडव नृत्य दिखा रही है। चिंतन करो मंथन करो सोचोअब अधिक  मेरा हनन नही। 

                       पर हमारे जवानों ने अपनी जान पर खेल कर आफत और राहत दोनों का जम कर मुकाबला किया वास्तव में भरतीयसेना काबिले तारीफ है देश का गौरव है मै ह्रदय से सलाम करती हूँ और ईश्वर से प्रार्थना करती हूँ जो बिछुड़ गये उन्हें मिलादे कश्मीर के निवासियों को इस दर्द को सहने की हिम्मत दे और नई जिन्दगी जीने की ताकत दे