हम खुश है
श्री अटल बिहारी बाजपेयजी जब सरहद के पार बस लेकर गये थे तब लिखी थी।
हमें मालूम है
हम जीवन के एकछोर से
दूसरे छोर को जोड़ने जा रहे।
रेगिस्तान के सागर में
मोती ढूढ रहे है।
फिर भी हम खुश है
हमे मालूम है
हम विकास की चरम सीमा को
आगे बढ़ाते जा रहे है
अणु बम परमाणु बम बना रहे है
नतीजा मालूम है
फिर भी हम खुश है
हमें मालूम है
हमने बहुत कुछ पा लिया
और पाने की लालसा में
आगे बढ़ते जा रहे है।
आगे शून्य है
फिर भी हम खुश है।
;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;
श्री अटल बिहारी बाजपेयजी जब सरहद के पार बस लेकर गये थे तब लिखी थी।
हमें मालूम है
हम जीवन के एकछोर से
दूसरे छोर को जोड़ने जा रहे।
रेगिस्तान के सागर में
मोती ढूढ रहे है।
फिर भी हम खुश है
हमे मालूम है
हम विकास की चरम सीमा को
आगे बढ़ाते जा रहे है
अणु बम परमाणु बम बना रहे है
नतीजा मालूम है
फिर भी हम खुश है
हमें मालूम है
हमने बहुत कुछ पा लिया
और पाने की लालसा में
आगे बढ़ते जा रहे है।
आगे शून्य है
फिर भी हम खुश है।
;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;