एक चाह
कभी -कभी मन कहता है
पंछी बन जाऊँ
नील गगन मे उड़ जाऊँ
अंबर से अवनि को देखूं।
तारों के संग घुमू
बादल की बादल रेखा बन
धीरे -धीरे खिसकु
गीत मिलन के गाउँ
पंछी बन उड़ जाऊँ
एक चाह नई लेके।
अंबर को मैं छुलू
धरती की हरियाली देखूं।
हर जीवन का जीवन देखूँ।
प्रित भरा मन लेके
मीत जनों का दुःख झेलू
हर दिल को छुलू
नील गगन में उड़ जाऊँ
पंछी बन जाऊं।
कभी -कभी मन कहता है
पंछी बन जाऊँ
नील गगन मे उड़ जाऊँ
अंबर से अवनि को देखूं।
तारों के संग घुमू
बादल की बादल रेखा बन
धीरे -धीरे खिसकु
गीत मिलन के गाउँ
पंछी बन उड़ जाऊँ
एक चाह नई लेके।
अंबर को मैं छुलू
धरती की हरियाली देखूं।
हर जीवन का जीवन देखूँ।
प्रित भरा मन लेके
मीत जनों का दुःख झेलू
हर दिल को छुलू
नील गगन में उड़ जाऊँ
पंछी बन जाऊं।