,
हम इस धरती के किरायेदार है न कि मालिक अंतः ;हमें इसका प्रयोग एक समझदार किरायेदार की तरह करना चाहिए अन्यथा इसके दु ष्परिणाम ही भुगतने होंगे '
अवनि से अम्बर तक ,बिखरते गये
सागर से हिमालय तक ,फैलते गये
विकास की चरम सीमा लाँघते गये
धरती गरम होती गई ,
ग्लेशियर ,हिमखण्ड ,पिघलते गये ,
प्रकृति की गोद में ,उधेड़बुन करते गये ,
हर जगह आशियाना ,बनाते गये
मेरे अस्तित्व को नकारा
कई बार कराया आभास ,
तुम न आये रास
कई तांडव नृत्य दिखाये
भूकम्प के क्रंदन का
सुनामी की उद्धत लहरों का
जल के असीम प्रवाह का।
आँधी तूफान का
मेरे क्रंदन को समझ न पाये।
आक्रोश बढ़ाते चले गये
देखा तुमने ?
महाप्रलय जल का
शिलाखंडों का बहना
धर्म की आस्था का बहजाना
बहुत कुछ पाने की लालसा में
सब कुछ खोजना
हम इस धरती के किरायेदार है न कि मालिक अंतः ;हमें इसका प्रयोग एक समझदार किरायेदार की तरह करना चाहिए अन्यथा इसके दु ष्परिणाम ही भुगतने होंगे '
अवनि से अम्बर तक ,बिखरते गये
सागर से हिमालय तक ,फैलते गये
विकास की चरम सीमा लाँघते गये
धरती गरम होती गई ,
ग्लेशियर ,हिमखण्ड ,पिघलते गये ,
प्रकृति की गोद में ,उधेड़बुन करते गये ,
हर जगह आशियाना ,बनाते गये
मेरे अस्तित्व को नकारा
कई बार कराया आभास ,
तुम न आये रास
कई तांडव नृत्य दिखाये
भूकम्प के क्रंदन का
सुनामी की उद्धत लहरों का
जल के असीम प्रवाह का।
आँधी तूफान का
मेरे क्रंदन को समझ न पाये।
आक्रोश बढ़ाते चले गये
देखा तुमने ?
महाप्रलय जल का
शिलाखंडों का बहना
धर्म की आस्था का बहजाना
बहुत कुछ पाने की लालसा में
सब कुछ खोजना