तुमने सब कुछ दिया
नीला आकाश
चाँद सितारे
सूरज की सुनहरी किरणें
संध्या की मादकता।
सुगंधित मधुवन
मधुवन में औषधि
मलय समीर
सुरभित पवन
बर्फ़ीले पहाड़
चंचल नदियाँ
स्वच्छ निर्मल जल
शांत सागर
सागर में
अनमोल रत्न मोती
सावन की घटा
मधुमास बसंत की छटा
रंगबिरंगी फूल
फूलों का उपवन
गंध सुगंध
फूलों की मधुर मुस्कान
ओस के मोती
फलों से लदी डाली- डाली
सुंदर वसुंधरा
हरियाली हरियाली
प्रकृति का आवरण
जीवन का गमनागम
ऋतुओं का आना जाना
मेघों में जलकण होना
इस इंद्रधनुषी सृष्टि के
स्वार्थ वशीभूत
हम निर्माता बन बैठे
रूप कुरूपकर दिया
आज वसुंधरा को
स्वार्थ वशीभूत हो
प्रदूषण से ढक दिया।
स्वार्थ वशीभूत हो
प्रदूषण से ढक दिया।