मुझे लगता हें कि जब भी कोई समारोह हो चाहे वो पार्टी का हो या राजनीति उसमे जो भी सम्मानित व्यक्ति आते है। उनको सम्मानित करने के लिए अच्छे शब्दों का ही प्रयोग करना काफी हैं। ना की फूल मालाओं से
क्यूकि फूल और मालाये तो मेरे विचार से भगवान और पुजा स्थल पर ही चढ़ाई जाती है या फिर अर्थी पर
इनसे लोगो को समान्नित करने के बाद ये, या तो बरबाद हो जाती है या फिर कुचल दी जाती है।
क्या ये पैसों की बरबादी नहीं है ?
खासकर हमारे नेताओं को इस बात पर विषेश ध्यान देना चाहिए। इस प्रकार का दिखावा किस बात का ? जब जनता ने तुम्हे इतना सम्मान दे कर संसद तक पोहचाह दिया। फिर क्यों एक दूसरे को फूल माला पहनाकर, समय का , धन का , और वस्तुओ को बरबाद कर रहे हो । क्या अब महंगाई नहीं है ? महंगाई को ध्यान में रखते हुए इस प्रकार का दिखावा आवश्यक नहीं है.
मेरे विचार से सम्मान के दो शब्द ही काफी होते हैं।
क्यूकि फूल और मालाये तो मेरे विचार से भगवान और पुजा स्थल पर ही चढ़ाई जाती है या फिर अर्थी पर
इनसे लोगो को समान्नित करने के बाद ये, या तो बरबाद हो जाती है या फिर कुचल दी जाती है।
क्या ये पैसों की बरबादी नहीं है ?
खासकर हमारे नेताओं को इस बात पर विषेश ध्यान देना चाहिए। इस प्रकार का दिखावा किस बात का ? जब जनता ने तुम्हे इतना सम्मान दे कर संसद तक पोहचाह दिया। फिर क्यों एक दूसरे को फूल माला पहनाकर, समय का , धन का , और वस्तुओ को बरबाद कर रहे हो । क्या अब महंगाई नहीं है ? महंगाई को ध्यान में रखते हुए इस प्रकार का दिखावा आवश्यक नहीं है.
मेरे विचार से सम्मान के दो शब्द ही काफी होते हैं।