जीवन के हर पल को जीलो
जीवन के हर पल को जी लो
मधु रस इसमें घो लो
मत राग द्वेष में उलझो
तू -तू मैं -मैं के झगड़े छोडो
जो तुझ में वो मुझ में नहीं
कोई नहीँ परिपूर्ण
मत बरबाद करो छण को
जीवन के हर पल को जी लो
मधु रस इसमें घो लो स
हर अणु को भर दो नव चेतन से
हृदय के तारों में भर दो वीणा की झंकार
वाणी को सुर दे दो वीणा का
फिर जीवन केरंग को देखो
सब कुछ विलीन हो जायेगा
केवल मधुरस रह जायेगा
जीवन के हर पल को जी लो
मधुरस इसमें घो लो
जो घट गया उसे जीवन से घटा दो।
जोड़ दो नव जागरण के तार
बज उठेगी जीवन की वीणा
स्वयंम निकल पड़ेगे सुर मधु रस के
चारों ओर नजर आयेगा वैभव
अंतरमन प्रफुल्लित हो जायेगा।
जीवन के हर पल को जी लो
मधुरस इसमें घो लो ;;;;;;;;;;;;;
जीवन के हर पल को जी लो
मधु रस इसमें घो लो
मत राग द्वेष में उलझो
तू -तू मैं -मैं के झगड़े छोडो
जो तुझ में वो मुझ में नहीं
कोई नहीँ परिपूर्ण
मत बरबाद करो छण को
जीवन के हर पल को जी लो
मधु रस इसमें घो लो स
हर अणु को भर दो नव चेतन से
हृदय के तारों में भर दो वीणा की झंकार
वाणी को सुर दे दो वीणा का
फिर जीवन केरंग को देखो
सब कुछ विलीन हो जायेगा
केवल मधुरस रह जायेगा
जीवन के हर पल को जी लो
मधुरस इसमें घो लो
जो घट गया उसे जीवन से घटा दो।
जोड़ दो नव जागरण के तार
बज उठेगी जीवन की वीणा
स्वयंम निकल पड़ेगे सुर मधु रस के
चारों ओर नजर आयेगा वैभव
अंतरमन प्रफुल्लित हो जायेगा।
जीवन के हर पल को जी लो
मधुरस इसमें घो लो ;;;;;;;;;;;;;