एक कली मुहाने पर खड़ी
दस्तक दे रही है
मैं आ रही हूँ
मैं देख़ रही
इक्क्सवी सदी के
अंतर मन की व्यथा।
क्या कोई हाथ उठेगा
जो मुझे थाम लेगा
उर से लगा के
प्यार देगा
या कोई वीभत्समानव
रौंद देगा
पर मैं आस लिए
दस्तक दे रही हूँ।
मैं आ रहीं हूं
पर मै आस लिए
दस्तक दे रही
मैं आ रही हूँ
कोई मुझे ज्ञान
प्रकाश देगा
मेरे उर की पीड़ा
हर`लेगा।
कोई अंधकार मैं
डुबो देगा
मेरे मन मैं
अगणित प्रश्न
पर मैं आस लिए
दस्तक दे रही हूँ
मैं आ रही हूँ
क्या कोई ?
माँग सिन्दूर भरेगा
हाथों मेहदी रचेगा
गले मंगल सूत्र सजेगा।
या कोई चौराहे पर
चीर हरण करेगा
या कोई कृष्ण
द्रोपती को बचायेगा
मैं आस लिए।
दस्तक दे रही हूँ
मैं आ रही हूँ
कौन महामानव
उत्तर देगा।
मेरे मन की पीड़ा हर लेगा
मैं आस लिए
नव जागरण की प्यास लिए।
मैं दस्तक दे रही हूँ
मैं आ रही हूँ ;;;;;;;आ रही।
पर मै आस लिए
दस्तक दे रही
मैं आ रही हूँ
कोई मुझे ज्ञान
प्रकाश देगा
मेरे उर की पीड़ा
हर`लेगा।
कोई अंधकार मैं
डुबो देगा
मेरे मन मैं
अगणित प्रश्न
पर मैं आस लिए
दस्तक दे रही हूँ
मैं आ रही हूँ
क्या कोई ?
माँग सिन्दूर भरेगा
हाथों मेहदी रचेगा
गले मंगल सूत्र सजेगा।
या कोई चौराहे पर
चीर हरण करेगा
या कोई कृष्ण
द्रोपती को बचायेगा
मैं आस लिए।
दस्तक दे रही हूँ
मैं आ रही हूँ
कौन महामानव
उत्तर देगा।
मेरे मन की पीड़ा हर लेगा
मैं आस लिए
नव जागरण की प्यास लिए।
मैं दस्तक दे रही हूँ
मैं आ रही हूँ ;;;;;;;आ रही।
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