नारी तुम जीवन दायनी
प्रेरणा श्रोत हो
अछय शक्ति हो
ताकत हो
आदि काल से
त्याग बलिदान की
मूर्ति हो
ममता का उद्गम हो
प्यार का उद्गार हो
भावनाओं का सागर हो
मानव विकास का प्रेरक हो
राष्ट्र और समाज का स्तम्भ हो
फिर आज क्यों व्यथित हो
आओ आज संकल्प लें
दढ़ संकल्प लें
मिलकर संजोले
आत्मबल ,बाहुबल बुद्धिबल
मांगे अपने अधिकार
समय की पुकार
विध्वंश कर दो
जो जल रहे कामना की प्रचंड
अग्नि में
बन जाओ सन सत्तावन
की तलवार
समय की पुकार
जागो बन जाओ
रण चंडी तुम
पहन मुण्ड की माल
हा ,हा कार मचा दो
फेलादो भय का कोहरा
बन जाओ फोलादी दिवार
समय की पुकार
प्रेरणा श्रोत हो
अछय शक्ति हो
ताकत हो
आदि काल से
त्याग बलिदान की
मूर्ति हो
ममता का उद्गम हो
प्यार का उद्गार हो
भावनाओं का सागर हो
मानव विकास का प्रेरक हो
राष्ट्र और समाज का स्तम्भ हो
फिर आज क्यों व्यथित हो
आओ आज संकल्प लें
दढ़ संकल्प लें
मिलकर संजोले
आत्मबल ,बाहुबल बुद्धिबल
मांगे अपने अधिकार
समय की पुकार
विध्वंश कर दो
जो जल रहे कामना की प्रचंड
अग्नि में
बन जाओ सन सत्तावन
की तलवार
समय की पुकार
जागो बन जाओ
रण चंडी तुम
पहन मुण्ड की माल
हा ,हा कार मचा दो
फेलादो भय का कोहरा
बन जाओ फोलादी दिवार
समय की पुकार
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