आत्मीय संवेदना
तुम आस थे
विश्वास थे
प्रणय सूत्र के
सूत्राधार
तुम इस तरह
विलीन हो गए
न जाने कहाँ
चले गए
बिखर गये जीवन के साज
टूट गई कल्पना की लड़ी।
नींद ढल गई
साथी तुम
बिछुड़ गए
ह्रदय में दर्द भरे
स्पन्दन का आभास
मस्तिष्क में
बेचैन यादों के शावक
छलागें मारने लगे
पीड़ाओं के कोहरे के बीच
प्रेम मिलन की
किरणें बिखर गईं
रह गई सर्द भरी यादें
तुम्हें महसूस करती
तुम्हारी यादों में
हर आहट में।
क्रिया कलापों में
बच्चों के प्रतिरूप में
जो छोड़ गए
पूरा करने की चाह में।
तुम्हारी यादों के सहारे
आरम्भ नया अध्याय
तुम्हें समर्पित मेरे
भावों के श्रद्धा सुमन
मन के उद्गार
तुम बन गए
मेरी यादों के सूत्राधार।
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