सोमवार, मार्च 02, 2015
प्रेम सुधारस बरसा दो
रविवार, फ़रवरी 15, 2015
व्यवस्था को बदलना होगा
गुरुवार, जनवरी 01, 2015
मैं समय हूँ
मंगलवार, दिसंबर 30, 2014
नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं
उषा का आगमन हो
यामिनी जाती रहे
पृथ्वी बसन्त मनाती रहे
प्रति पल ,प्रति प्रहर ,
प्रति दिवस ,प्रति मास
सुखद परिवर्तन हो
प्रेम स्नेह ,प्यार
पारिजात पुष्प समूह
से सुवासित हो
अवसाद का नाम न हो
आनन्द का उन्माद हो
नव वर्ष ऐसा हो
इन्ही भावनाओं के साथ आप सभी लोगों नव वर्ष मुबारक हो .
शनिवार, दिसंबर 06, 2014
शुक्रवार, नवंबर 14, 2014
मंगलवार, नवंबर 11, 2014
कफ़न की जेब नहीं होती
सुनो मेरे दोस्तो
कफ़न की जेब नहीं होती
कब तक भागोगे
कहां ले जाओगे
कब तक लूटोगे
सब कुछ धरा रह जायेगा
कुछ भी साथ न जायेगा
जिन्दगी छोटी होती है
याद रखो
कफ़न की जेब नहीं होती
कब तक स्विस बैंक भरोगे
कब तक घोटाले करोगे
कब तक सीमाएं लांघोगे
जब हवा ही स्वच्छ न होगी
जी के क्या करोगे
जिंदगी छोटी होती है
याद रखो
कफ़न की जेब नही होती
नीला अंबर ही नीला न होगा
हवा में सुगन्ध ही न होगी
जल ही निर्मल न होगा
तब बैंक का क्या होगा
मत अभिशाप बनो
आने वाली पीढ़ी के लिए
जिंदगी छोटी होती है
याद रखो
कफ़न की जेब नही होती
क्षणिक सुख के लिए
कामना की प्रचण्ड अग्नि को
मत प्रज्वलित करो
देव भूमि को मत
मरुभूमि में बदलो
अंधकार से बाहर निकलो
जीवन की परिभाषा जानो
जिंदगी छोटी होती है
याद रखो
कफ़न की जेब नही होती
कब तक संकल्पों के
विकल्पों को ढूंढोगे
स्वच्छ आकाश ,निर्मल जल
सुगंधित हवा
देकर जाओ आने वाली पीढ़ी को
स्विस बैंक नहीं
सब कुछ धरा रह जायेगा
कुछ भी साथ न जायेगा
जिंदगी छोटी होती है
याद रखो
कफ़न की जेब नही होती.
सुनो मेरे दोस्तो
कफ़न की जेब नहीं होती
कब तक भागोगे
कहां ले जाओगे
कब तक लूटोगे
सब कुछ धरा रह जायेगा
कुछ भी साथ न जायेगा
जिन्दगी छोटी होती है
याद रखो
कफ़न की जेब नहीं होती
कब तक स्विस बैंक भरोगे
कब तक घोटाले करोगे
कब तक सीमाएं लांघोगे
जब हवा ही स्वच्छ न होगी
जी के क्या करोगे
जिंदगी छोटी होती है
याद रखो
कफ़न की जेब नही होती
नीला अंबर ही नीला न होगा
हवा में सुगन्ध ही न होगी
जल ही निर्मल न होगा
तब बैंक का क्या होगा
मत अभिशाप बनो
आने वाली पीढ़ी के लिए
जिंदगी छोटी होती है
याद रखो
कफ़न की जेब नही होती
क्षणिक सुख के लिए
कामना की प्रचण्ड अग्नि को
मत प्रज्वलित करो
देव भूमि को मत
मरुभूमि में बदलो
अंधकार से बाहर निकलो
जीवन की परिभाषा जानो
जिंदगी छोटी होती है
याद रखो
कफ़न की जेब नही होती
कब तक संकल्पों के
विकल्पों को ढूंढोगे
स्वच्छ आकाश ,निर्मल जल
सुगंधित हवा
देकर जाओ आने वाली पीढ़ी को
स्विस बैंक नहीं
सब कुछ धरा रह जायेगा
कुछ भी साथ न जायेगा
जिंदगी छोटी होती है
याद रखो
कफ़न की जेब नही होती.
गुरुवार, अक्टूबर 23, 2014
सोमवार, सितंबर 22, 2014
शनिवार, सितंबर 20, 2014
हम खुश है
श्री अटल बिहारी बाजपेयजी जब सरहद के पार बस लेकर गये थे तब लिखी थी।
हमें मालूम है
हम जीवन के एकछोर से
दूसरे छोर को जोड़ने जा रहे।
रेगिस्तान के सागर में
मोती ढूढ रहे है।
फिर भी हम खुश है
हमे मालूम है
हम विकास की चरम सीमा को
आगे बढ़ाते जा रहे है
अणु बम परमाणु बम बना रहे है
नतीजा मालूम है
फिर भी हम खुश है
हमें मालूम है
हमने बहुत कुछ पा लिया
और पाने की लालसा में
आगे बढ़ते जा रहे है।
आगे शून्य है
फिर भी हम खुश है।
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सोमवार, सितंबर 15, 2014
एक चाह
कभी -कभी मन कहता है
पंछी बन जाऊँ
नील गगन मे उड़ जाऊँ
अंबर से अवनि को देखूं।
तारों के संग घुमू
बादल की बादल रेखा बन
धीरे -धीरे खिसकु
गीत मिलन के गाउँ
पंछी बन उड़ जाऊँ
एक चाह नई लेके।
अंबर को मैं छुलू
धरती की हरियाली देखूं।
हर जीवन का जीवन देखूँ।
प्रित भरा मन लेके
मीत जनों का दुःख झेलू
हर दिल को छुलू
नील गगन में उड़ जाऊँ
पंछी बन जाऊं।
शनिवार, सितंबर 13, 2014
जन्नत पर कहर।
कश्मीर में कुदरत का कहर चारों ओर पानी ही पानी जल का महा प्रलय। सड़कें झील में बदल गई जिन्दगी थम गई। बच्चे से बूढ़े तक सब दर्द से भरे घर उजड़े लोग बिछुड़े इंसान बेबस हो गया इस सैलाब ने कश्मीर में हा हा कार मचा दिया क्याये कुदरत की चेतावनी है या आक्रोश या उस का क्रंदन एक साल पहले जल का महाप्रलय केदारनाथ में हुआ कुदरत ऐसा क्यों कर रही है ?हम को कुदरत बार _बार तांडव नृत्य दिखा रही है। चिंतन करो मंथन करो सोचोअब अधिक मेरा हनन नही।
पर हमारे जवानों ने अपनी जान पर खेल कर आफत और राहत दोनों का जम कर मुकाबला किया वास्तव में भरतीयसेना काबिले तारीफ है देश का गौरव है मै ह्रदय से सलाम करती हूँ और ईश्वर से प्रार्थना करती हूँ जो बिछुड़ गये उन्हें मिलादे कश्मीर के निवासियों को इस दर्द को सहने की हिम्मत दे और नई जिन्दगी जीने की ताकत दे
बुधवार, सितंबर 10, 2014
जीवन के हर पल को लो
जीवन के हर पल को जी लो
मधु रस इसमें घो लो
मत राग द्वेष में उलझो
तू -तू मैं -मैं के झगड़े छोडो
जो तुझ में वो मुझ में नहीं
कोई नहीँ परिपूर्ण
मत बरबाद करो छण को
जीवन के हर पल को जी लो
मधु रस इसमें घो लो स
हर अणु को भर दो नव चेतन से
हृदय के तारों में भर दो वीणा की झंकार
वाणी को सुर दे दो वीणा का
फिर जीवन केरंग को देखो
सब कुछ विलीन हो जायेगा
केवल मधुरस रह जायेगा
जीवन के हर पल को जी लो
मधुरस इसमें घो लो
जो घट गया उसे जीवन से घटा दो।
जोड़ दो नव जागरण के तार
बज उठेगी जीवन की वीणा
स्वयंम निकल पड़ेगे सुर मधु रस के
चारों ओर नजर आयेगा वैभव
अंतरमन प्रफुल्लित हो जायेगा।
जीवन के हर पल को जी लो
मधुरस इसमें घो लो ;;;;;;;;;;;;;