संसद भी बन गई ,नई सरकार भी प्रधानमन्त्री मोदी जी के नाम से काम करने वाले और न करने वाले सभी जीत के संसद तक पहुँच गये जिस क्षेत्र जगह से ये जीत क़र आये है क्या ये अपने- अपने क्षेत्र को उसी तरह बना देंगे जैसे मोदी जी का बनारस जब कि मोदी जी के पास पूरे देश का भार है हमारी कार्य प्रणाली का विभाजन पहले एमपी ,फिर एम. एल. ए. पार्षद ,ग्राम पंचायत ये सभी एक क्षेत्र के लोगों का आपस में सही समन्वय हो तो काम सुचारू रूप से सही तरीके से हर जगह होगा अगर नेता देश की सेवा करना चाहते है तो तन ,मन जनता के धन का सही और मेह्नत के साथ उपयोग करे ताकि आने वाले पांच सालों में मोदी जी कि सरकार के अलावा कोई दूसरा विकल्प न हों ।
बुधवार, जून 19, 2019
मंगलवार, जून 18, 2019
मेघदूत
मेघदूत
मेघदूत तुम
पहाड़ों को छूते
आकाश में विचरते
विभिन्न रूप रखते
धीरे -धीरे् खिसकते
न जाने कहाँ चले जाते
हे मेघदूत
ग्रीष्म का मार्तड [सूरज ]
धरा को तपाता
धरती चर व्याकुल होते
बाट निहारते
तुम गरजते- गरजते
न बरसते
कहां चले जाते
हे जलद
जल कण ढोते- ढोते
तुम थकते नहीं
पथिक राहगीर
तुम्हें निहारते
बरसा दो मधुरस
बुझा दो प्यास धरा की
हे मेघदूत
तुम क्यों निष्ठुर बन जाते
जहां नहीं बरसना
वहां बरस जाते
धरा पर
जल का प्रलय मचा देते
धधकती धरा पर
बूंद नहीं बरसाते
कैसा तुम्हारा रूप
हे मेघदूत
क्यों नील गगन से
आँख मिचौली करते
बिना तुम्हारे
नहीं अस्तित्व धरा का
प्रकृति की हरियाली
हर जीवन का
जीवन तुमसे
धरा नीरद वारिद ,नील
नीर बरसा दो
धरा की प्यास
बुझा दो
हे मेघदूत
जब मेघ घमण्ड
गर्जहीं घन घोरा
पशु मृग पछी
नाचत मोरा
हे मेघदूत
अपना मधुरस
मरु भूमि में
बरसा दो
रेतीले होठों की
प्यास बुझा दो
घन घटाओं को फैला दो
मधुरस बरसा दो
बरसा दो।
शनिवार, अप्रैल 13, 2019
भय का कोहरा
भय का कोहरा
भय का कोहरा
छँटता नजर नहीं आता
हर शहर गाँव
गलियों पर अँधियारा
कब कौन
कहाँ से आ जाए
मासूम कलियों
को नोच ले
अब शहर की भीड़
में भी डर लगता है
दन दनाती गोलियाँ '
किधर से आ जाए
चीख पुकार
मातम में बदल जाए
हर चेहरे पर
दहशत है
बाहर से खुशनुमा
अंदर से डर
न जाने कब
भारी बूटों के दानव।
मानवता को
रौंदते चले जाएं
हा हा कार
चीख़ पुकार
फिर
चिता जलने के बाद
मुर्दा घाट की तरह
सब शान्त
तब सरकार
हरकत मै आयेगी
गली मोहल्ले चौराहे पर
चौकसी बढ़ा दी जायेगी
जवान बंदूकें लिए
इधर उधर घूमते
नजर आयेंगे
घायलों को अस्पताल
लाशों को जला दिया जायेगा
क्या राख की चिंगारी से
कोई अंगारा पैदा होगा
जो कलियों को मसलने से
मानवता को लुटने से
रोके।
कौन महामानव
उत्तर देगा
मेरे मन की
पीड़ा हर लेगा
बुधवार, सितंबर 05, 2018
तुमने सब कुछ दिया
तुमने सब कुछ दिया
नीला आकाश
चाँद सितारे
सूरज की सुनहरी किरणें
संध्या की मादकता।
सुगंधित मधुवन
मधुवन में औषधि
मलय समीर
सुरभित पवन
बर्फ़ीले पहाड़
चंचल नदियाँ
स्वच्छ निर्मल जल
शांत सागर
सागर में
अनमोल रत्न मोती
सावन की घटा
मधुमास बसंत की छटा
रंगबिरंगी फूल
फूलों का उपवन
गंध सुगंध
फूलों की मधुर मुस्कान
ओस के मोती
फलों से लदी डाली- डाली
सुंदर वसुंधरा
हरियाली हरियाली
प्रकृति का आवरण
जीवन का गमनागम
ऋतुओं का आना जाना
मेघों में जलकण होना
इस इंद्रधनुषी सृष्टि के
स्वार्थ वशीभूत
हम निर्माता बन बैठे
रूप कुरूपकर दिया
आज वसुंधरा को
स्वार्थ वशीभूत हो
प्रदूषण से ढक दिया।
स्वार्थ वशीभूत हो
प्रदूषण से ढक दिया।
रविवार, सितंबर 02, 2018
कान्हा आ जा
कान्हा आ जाओ
पक्ष विपक्ष में
पक्ष विपक्ष में
कौरवों की जमात
कहीं कंस
कहीं शकुनी
राजनीति उलझी पड़ी
बीच में जनता फंसी
द्रोणाचार्य युधिष्ठर
उलझे सत्ता मै
धृतराष्ट्र दुर्योधन
सब फंसे
एक भीष्म पितामह
क्या करें
कान्हा आ जाओ
महाभारत सुलझाया
भारत की
राजनीति सुलझा दो
नेताओं को
बंसी के स्वर दे दो
जनता के घावों को
चंदन कर दो
कदम्ब की
शीतल छाया फैला दो
भारत को मधुवन कर दो
मधुवन कर दो.
शुक्रवार, अगस्त 17, 2018
भावपूर्ण श्रद्धांजलि
भूतपूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्री अटलबिहारी बाजपेयी एक आदर्श प्रधानमंत्री ,एक कवि ,एक चरित्रवान व्यक्ति,एक पत्रकार ,एक महान विचारक बहु आयामी व्यक्तित्व न जाने अपने में क्या -क्या रंग
समेटे हुए थे। हमने एक महान व्यक्तित्व को खो दिया उनका जाना हिंदुस्तान के लिए एक महान क्षति है। ऐसे महान व्यक्तित्व को मैं अपने भावों के श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए महान आत्मा को कोटि- कोटि बार प्रणाम करती हूँ ।
तुम बहुमुखी ,बहुआयामी
प्रतिभा लिए
आए भारत की राजनीति में
तुम महान चरित्रवान ,
महान विचारक
सर्वमान्य जन नेता ,
राजनेता ,लोकतान्त्रिक
कवि हृदय
करुणामयी ,कोमलता
नाम के अनुरूप
काम तुम्हारें
अटल नीति ,अटल विचारक
तुम ज्ञानी ,बहुआयामी
देश स्वाभिमान का मंत्र दे गये ;
तुम कर्तव्यशील
जीवन के कर्म योगी बन
दूर कहीं छिप गये ;
तुम प्रेरणा के स्त्रोत बन।
हे महान आत्मा।
सृष्टि के श्रेष्ठ हो गये.
सोमवार, अगस्त 13, 2018
सावन ऐसे छाये
सावन ऐसे छाये
रंग तीज का भर लाये
धरा हरित रंग मुस्काई
नव यौवन में बहार छाई
देह गंध छंद सुगंध
मधुर -मधुर सुगंध छाई
रस रंग प्रेम संग
नार श्रृंगार कर
नव यौवम भर लाई
सावन ऐसे छाये
रंग तीज का भर लाये
घन गरजे बरसे
वर्षा फुहार छाई
खन- खन चूड़ी खनके
छम छम पायल बाजे
तीज के रंग में
रंग गई नार
मेंहदी रचे ,माँग भरे
करे सोलह श्रृंगार
सावन ऐसे छाये
रंग तीज का भर लाये
पड़ गये झूले सावन के
आँगन छाई बहार
प्रकृति ने ली अंगड़ाई
पात -पात पल्लव - पल्लव
धरा उर हलचल छाई
अल्हड़ चंचल मस्त हँसी
अनन्त राग सरिता बहे
कजरारे नयन
चंचल चितवन
नयनो की कोरों से
उन्माद छलके
सावन ऐसे छाये
रंग तीज का भर लाये
फूलों पर भौरें इतराये
तरुणी की तरुणाई छाई
निल निलय पलकों से
प्रेम रस उन्माद बरसे
सावन ऐसे छाये
रंग तीज का भर लाये .
गुरुवार, जून 21, 2018
, आत्मीय संवेदना 2 january 2018
आत्मीय संवेदना
तुम आस थे
विश्वास थे
प्रणय सूत्र के
सूत्राधार
तुम इस तरह
विलीन हो गए
न जाने कहाँ
चले गए
बिखर गये जीवन के साज
टूट गई कल्पना की लड़ी।
नींद ढल गई
साथी तुम
बिछुड़ गए
ह्रदय में दर्द भरे
स्पन्दन का आभास
मस्तिष्क में
बेचैन यादों के शावक
छलागें मारने लगे
पीड़ाओं के कोहरे के बीच
प्रेम मिलन की
किरणें बिखर गईं
रह गई सर्द भरी यादें
तुम्हें महसूस करती
तुम्हारी यादों में
हर आहट में।
क्रिया कलापों में
बच्चों के प्रतिरूप में
जो छोड़ गए
पूरा करने की चाह में।
तुम्हारी यादों के सहारे
आरम्भ नया अध्याय
तुम्हें समर्पित मेरे
भावों के श्रद्धा सुमन
मन के उद्गार
तुम बन गए
मेरी यादों के सूत्राधार।
;
मंगलवार, सितंबर 26, 2017
महाकवि तुलसीदास जी को समर्पित
महाकवि तुलसीदास जी को समर्पित
कैसे तेरा गुणगान करूं
तुम अद्वितीय हो
अनन्त हो शाश्वत हो
अपने आराध्य देव का
नाम लिए जन्मे हो।
तुम तो आये धरा पर
राम नाम चरितार्थ करने।
केवल राम नाम में
लिख डाला महाकाव्य
समझा दिया मानव को
मानवता का पाठ
दिखा गए विश्व को
मुक्ति का द्वार
हे महान आत्मा
तुम अमरत्व को
हो गये प्राप्त
तुम्हारे रामचरित्र मानस में
सूर के सूरसागर में
अथाह ज्ञान का भंडार
तुम चरितार्थ कर गये
त्रेता व द्वापर युग को
मैं उलझ गई।
कैसे समझाऊं बच्चों को
तुलसी की रामायण
सूर का सूरसागर
सब यंत्र चलित
हो गये कलयुग में
सब भाग रहे
एक दूसरे की होड़ में
धन वैभव का जोश
राम नाम का न होश
कैसे करुं तुम्हारा मान।
अन्दर से क्षुब्ध हूँ व्यथित हूँ
कैसे करूँ गुणगान।
बच्चे राह भटक रहे
चकाचौंध में उलझ रहे
कैसे इनको समझाऊं
कोई ध्येय इन्हें बताऊ.
बीज शाश्वत का जो बो गए
इनके अन्दर पनपाऊं
हे महान आत्मा
तब समझ परिपूर्ण
मान तुम्हारा
हे तुलसी शत -शत बार नमन हमारा
सोमवार, अक्टूबर 03, 2016
समय की पुकार
उड़ी आतंकी हमले में शहीद जवानों को मेरा कोटि- कोटि प्रणाम भारत की सेना ने इस आतंक का जो मुहँ तोड़ जवाब दिया उनका में हार्दिक अभिनन्दन करती हूँ.
समय की पुकार
दुश्मन किसी समय
किसी भी पल
किसी भी छण
कर सकता प्रहार
समय की पुकार
संकल्प करो ,दृढ़ संकल्प
जान जाए पर आन न जाए
बन जाओ
सन सत्तावन की तलवार
दुश्मन कभी भी
कर सकता प्रहार
समय की पुकार .
बाहुबल 'बुद्धिबल
आत्मबल संजो लो
मत होने दो.
मानवता पर
दानवता का प्रहार
दुश्मन कभी भी
कर सकता वार
समय की पुकार
वीणा के तारों में भर दो
रण दुंदभि की झंकार
सीमाओं पर फैला दो
भय का कोहरा
बन जाओ फौलादी दीवार
समय की पुकार
जागो बन जाओ रणचंडी
पहन मुंड की माल
हा -हा कार मचा दो
सरहद के उस पार
दुश्मन कभी भी
कर सकता प्रहार
समय की पुकार .
उपरोक्त कविता युवाऔं के लिये है
शुक्रवार, अगस्त 14, 2015
स्वतंत्र देश में सब हो भयमुक्त
सभी दोस्तों को स्वतंत्रता दिवस की बधाई
स्वतंत्र देश में
सब भय मुक्त हों
प्रेम का अंकुरण हो
अवसाद का नाम
न हो
कर्म की सरिता बहे
अंतर्मन विकसित हो
नव सर्जन की क्रांति हो
व्याभिचार का नाम न हो
नारी का उत्थान हो
सुशासन की राजनीति हो
सर्व पंथ समभाव हो
फ़िर से
राम राज्य का आगमन हो
मेरा देश ऐसा हो
स्वतंत्र देश में
सब भय मुक्त हों
प्रेम का अंकुरण हो
अवसाद का नाम
न हो
कर्म की सरिता बहे
अंतर्मन विकसित हो
नव सर्जन की क्रांति हो
व्याभिचार का नाम न हो
नारी का उत्थान हो
सुशासन की राजनीति हो
सर्व पंथ समभाव हो
फ़िर से
राम राज्य का आगमन हो
मेरा देश ऐसा हो
गुरुवार, जुलाई 30, 2015
हे महामानव अब्दुल कलाम
पूर्व राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम एक महान वैज्ञानिक,एक मिसाइल मैन, एक कवि ,एक शिक्षक ,एक संगीत प्रेमी ,एक महान व्यक्तित्व न जाने क्या -क्या रंग अपने मेँ समेटे हुऐ थे. जिन्होंने जीवन भर काम ही काम किया और काम करते -करते चले गए हमने एक महान व्यक्तित्व को खो दिया ऐसी महान आत्मा को मैं अपने भावों के श्रद्धा सुमन अर्पित करती हुए कोटि -कोटि बार प्रणाम करती हूँ.
भारत के इस महामानव को
शत -शत बार प्रणाम
तुम इस धरा पर
कई रंगो में विद्यमान
तन मन धन सब अर्पित कर
राष्ट्र को दे गए प्राण
बच्चों में नूतन स्वर भर
ज्ञान की धारा
धरा से चली गई
तुम जाते -जाते दे गए संदेश
तुम्हारा हर शेष
बन गया विशेष
तुम निरंतर चलते रहे
राष्ट्र की चेतना बन गए
तुम दृढ़ता वात्सल्य
भावनाओं से भरे हुए
प्रतीक बन कर रह गए
बोलते -बोलते स्वर लुप्त हो गए
वाणी का प्रवाह थम गया
तुम मौन हुए चले गए
प्रेरणा बन कर रह गए
हे महान आत्मा
तुम सृष्टि श्रेष्ठ बन गए.
नव वर्ष मुबारक
नव वर्ष मुबारक
( सभी लोगों को नव वर्ष मुबारक हो मंगलमय हो
हृदय के उपवन
विकसित हो मन
हो मधुर प्रभात
रंग गंध प्रेम स्नेह
फैले दिग दिगंत
नव बसंत हर
आंगन आए
ज्योति पुंज का
हो प्रकाश ,
स्वर्ण रश्मि की
आभा फैले ,
करें एक दूजे
का अभिनन्दन
वाणी में वीणा
की ध्वनि हो
जीवन हो मधुसार
आध्यात्मिकता
का हो प्रवाह
समग्र मानव जाति का हो उत्थान
( सभी लोगों को नव वर्ष मुबारक हो मंगलमय हो
हृदय के उपवन
विकसित हो मन
हो मधुर प्रभात
रंग गंध प्रेम स्नेह
फैले दिग दिगंत
नव बसंत हर
आंगन आए
ज्योति पुंज का
हो प्रकाश ,
स्वर्ण रश्मि की
आभा फैले ,
करें एक दूजे
का अभिनन्दन
वाणी में वीणा
की ध्वनि हो
जीवन हो मधुसार
आध्यात्मिकता
का हो प्रवाह
समग्र मानव जाति का हो उत्थान
सोमवार, जुलाई 27, 2015
मैं गंगा हूं...
मैं गंगा अनंत काल से
गंगोत्री ,गोमुख से निकल
हिम खण्डों चट्टानों से टकराकर
निर्मल निलाभ जल लेकरस्वच्छंद मनमौजी
बहती जाती ,बहती जाती
मेरे विशाल हृदय में
जलचर ,मत्स्य कुल
निर्भय करते विचरण
मैं कल -कल ,छल -छल
दुर्गम पथ राह बनाती
बहती जाती ,बहती जाती
मैं तन मन मस्त
पहाड़ों से अटखेलियां कर
हिमालय से सुंदरवन तक
विशाल भू -भाग को सींचती
हरियाली ही हरियाली लाती
जीवन का संगीत सुनाती
बहती जाती ,बहती जाती
मैं हिमालय वाहिनी गंगा
मुक्ति दाता ,पाप हरता
तुम्हारी भावनात्मक आस्था
समझ न सकी
हर हर गंगे ,हर हर गंगे
प्रतिध्वनि मेरे तट पर होती
मैं समझ न पाती
प्रतिक्षण -प्रतिपल सुनते ,सुनते
बहती जाती ,बहती जाती
देश -विदेश सात समुद्र पार
समेट पात्र मुझको ले जाते
बूंद -बूंद तर्पण अर्पण कर
जन्म मृत्यु तक साथ निभाती
मैं बहती जाती ,बहती जाती
मुझमे ही तुम स्वच्छ होते
मुझ में ही धोते पाप
कूड़ा करकट नाले
बड़ी मिलों का गंदा पानी
मुझे समर्पित करते
तुम स्वच्छ हो ,मुझे अस्वच्छ करते
मेरे उर की पीड़ा बढ़ जाती
पथ -पथिक ,राह राहगीर
अंजलि भर -भर प्यास बुझाती
स्वार्थ भरे जीवन से
निस्वार्थ प्रेम करो मुझसे
मेरे उर की पीड़ा समझो
मेरे तन को साफ करो
मैं प्रेरणास्रोत बन
आकुल व्याकुल ,
बहती जाती -बहती जाती
समय सागर से मिलने को आया
मैं मिलन का उन्माद लिए
आतुर सागर से मिलने को व्याकुल
बहती जाती ,बहती जाती
सागर को देख निकट
मेरे मन की व्यथा विकट
मेरे उर का संगीत मचल
आंचल में हल चल
मैं उत्तेजित जल धारा
आतुर व्याकुल सागर में मिल जाती
मैं सागर की हो कर ,सागर बन जाती.
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