सावन ऐसे छाये
सावन ऐसे छाये
रंग तीज का भर लाये
धरा हरित रंग मुस्काई
नव यौवन में बहार छाई
देह गंध छंद सुगंध
मधुर -मधुर सुगंध छाई
रस रंग प्रेम संग
नार श्रृंगार कर
नव यौवम भर लाई
सावन ऐसे छाये
रंग तीज का भर लाये
घन गरजे बरसे
वर्षा फुहार छाई
खन- खन चूड़ी खनके
छम छम पायल बाजे
तीज के रंग में
रंग गई नार
मेंहदी रचे ,माँग भरे
करे सोलह श्रृंगार
सावन ऐसे छाये
रंग तीज का भर लाये
पड़ गये झूले सावन के
आँगन छाई बहार
प्रकृति ने ली अंगड़ाई
पात -पात पल्लव - पल्लव
धरा उर हलचल छाई
अल्हड़ चंचल मस्त हँसी
अनन्त राग सरिता बहे
कजरारे नयन
चंचल चितवन
नयनो की कोरों से
उन्माद छलके
सावन ऐसे छाये
रंग तीज का भर लाये
फूलों पर भौरें इतराये
तरुणी की तरुणाई छाई
निल निलय पलकों से
प्रेम रस उन्माद बरसे
सावन ऐसे छाये
रंग तीज का भर लाये .
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