शनिवार, अगस्त 16, 2014

वयर्थ की बरबादी

मुझे  लगता हें कि जब  भी कोई  समारोह  हो चाहे वो पार्टी का हो या राजनीति उसमे जो भी सम्मानित व्यक्ति आते है। उनको  सम्मानित करने के लिए अच्छे शब्दों का ही प्रयोग करना काफी हैं। ना की फूल मालाओं से
क्यूकि फूल और मालाये तो मेरे विचार से भगवान और पुजा स्थल पर ही चढ़ाई जाती है या फिर अर्थी पर
इनसे लोगो को समान्नित करने के बाद ये, या तो बरबाद हो जाती है या फिर कुचल दी जाती है।
क्या ये पैसों की बरबादी नहीं है  ? 
            खासकर हमारे नेताओं को  इस बात पर विषेश ध्यान देना चाहिए। इस प्रकार का दिखावा किस बात का ? जब जनता ने तुम्हे इतना सम्मान दे कर संसद तक पोहचाह दिया। फिर क्यों एक दूसरे को फूल माला पहनाकर, समय का , धन का , और वस्तुओ को बरबाद कर रहे हो । क्या अब महंगाई नहीं है ? महंगाई  को ध्यान में रखते हुए इस प्रकार का दिखावा आवश्यक नहीं है. 
  मेरे विचार से सम्मान के दो शब्द ही काफी होते  हैं।

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