मंगलवार, दिसंबर 22, 2020

चिंतन

आओ घर बैठे सोचें
चिन्तन करें मंथन करें
अपने अंदर की
करुणा सहज सरल
दया भाव उदार
जो मानव की
मानवता की पहचान
कहां खो गई
तनिक चिन्तन करें
मंथन करे
संयम सहनशीलता
विनम्रता
जो मानव अस्तित्व
का आधार
कहां खो गया
आओ चिन्तन करें
मंथन करें
ये समय हे
राष्ट्र हित में
साधना तपस्या का
अंर्तमन विकसित करो
उज्ज्वल करो
आओ थोड़ा चिन्तन करें
मंथन करें
पथ कठिन है
हम एक है
राह उलझ गई है
तो सुलझ जाएगी
चिंताओं से परे
चेतनाओं से भरे
सहज होने का
आओ चिन्तन करें
मंथन करें
माना इस घड़ी में
कुछ खोया तो कुछ पाया है
सकारात्मक सोचो
प्रदूषण कम हुआ
मंद मधुर पवन
सांसों में मधुर
समीर का आगमन
आओ सोचे
चिंतन करें मंथन करें
कैसे सहभागी
बने  प्रकृति के
कैसे बचायें धरा के
इंद्रधनुषी रंग को
कोई नहीं आयेगा
हमें ही सहलाने होगें
एक दूसरे के ह्रदय की
दुख- सुख पीड़ा
हमें ही बचाने होगें
अपने संस्कार
अपनी संस्कृति
तनिक चिंतन करें
मंथन करें.
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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