कुछ पल जी लें
अकेले बैठ ,अपने से बात करें
कुछ पल जी लें
प्रातःकाल की रश्मि हो
उगते सूरज को देखें
पेड़ों की शीतल छाया हो
शान्त अकेला मन हो
मधुर मलय समीर स्पर्श हो
डाली पर बैठी
चिड़िया को सुने
कुछ सपने बुने
कुछ सपने चुने
कुछ पल जी लें
अपने से बात करें.
संध्या की मादकता हो
ढलते सूरज की लालिमा देखें
विहगों का कलरव सुनें
ऋतु राज बसंत की
मस्ती देखें
सावन के झूले झूलें
फूलों का उपवन देखें
भोरों की गुंजन सुने
कुछ पल जी लें
अपने से बात करें
शान्त सागर देखें
लहरों की आवाज सुने
सागर सरिता का
मिलन देखें
झरने की झंकार सुने
चाँदनी से सजी यामिनी का
श्रृंगार देखें
न जाने समय पंख लगाये
कब उड़ जायेगा
आओ अपने से बात करें
कुछ पल जी लें
कुछ पल जी लें .........
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