रानीखेत की बरसात
जन कोलाहल से दूर जहां चीड़ के पेड़ों के जंगल ,न फैक्टिरियां न ही उनका धुआं न इंसानों की भीड़ सब कुछ शांत है न दम घुटता न ही अपराध पनपते घने जंगलों के बीच छिपा हुआ शहर अपनी अनुपम सौन्दर्यता से सबको अपनी ओर खींच लेता है। बर्फ से ढका हिमालय शहर से नजर आती हरी -भरी घाटियां
शहर से कुछ दूर हरी घास ने अपना मखमली बिछौना बिछाया है. दूर -दूर तक यह मैदान हरा-भरा है यहाँ एक गोल्फ क्लब भी है लगता है इतनी ऊंचाई और हरियाली के बीच यही एक गोल्फ क्लब है।
मैं प्रकृति के इस सौन्दर्य को निहारते मंत्रमुग्ध पलकें बंद किए इस सौन्दर्य और ठण्डी हवाओं
के झोंकों के स्पर्श से एक नैसर्गिक आनंद की अनुभूति में खो गई ,कुछ क्षणों के लिए लगा जीवन की गति थम गई है,शांत मन में कुछ पल चिन्ताओं से मुक्त एक अनोखे सुख की अनुभूति होने लगी और अचानक बरसात का आगमन जंगलों से ढका शहर होने के कारण पानी भी बहुत बरसता है रानीखेत में. बरसात क्या आती है यहाँ का हर कोना -कोना निखर उठता है.
शहर में रिमझिम वर्षा हो रही है तो दूर जंगल में धूप खिली होती है ऐसा लगता स्वच्छ नीले आकाश के स्वच्छ जल से प्रकृति रूपी दुल्हन नहा रही हो कुछ समय बाद ऊँची पहाड़ियों से दूर बहुत दूर तक बादल बरसते हुए निकल जाते. जब शहर नहा चुका होता है तब लगता है पहाड़ियां बादल की गोद में जाकर बैठ गई हों या हरिभरी वादियों में आराम करने लगे हों. उसी क्षण प्रकृति का दूसरा नजारा सामने आता है घाटियों से कोहरा उड़ने लगता है कुछ क्षणों के लिये पूरे शहर को सफेद चादर से ढक लेता है दिन भर पानी बरसता है.
प्रकृति अपने नृत्य दिखाती रहती है जब शाम को बरसात थम जाती है. कोहरा छटने लगता है. स्वच्छ
नीला आकाश नजर आता है. तब बादलों के बीच से झाँकती हुई बर्फ से भरी नन्दादेवी और त्रिशूल की चोटियाँ सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करके उन्हें मन्त्र मुग्ध कर देती है.
प्रकृति के इस मनमोहक इंद्रधनुषी रूप को देखने से लगता है. ब्रह्म भी इस सौन्दर्य में अपने आनंद को प्रकट करने लगा है या प्रकृति का सारा सौन्दर्य इन हिमाच्छादित चोटियों में समा गया है.
मुझे लगता है इसीलिए इन्हीं पर्वतश्रेणियों के साथ हिन्दू जाति की स्मृतियाँ जुड़ी हैं. यही हमारे ज्ञान और चिन्तन का केन्द्र है.