महाकवि तुलसीदास जी को समर्पित
कैसे तेरा गुणगान करूं
तुम अद्वितीय हो
अनन्त हो शाश्वत हो
अपने आराध्य देव का
नाम लिए जन्मे हो।
तुम तो आये धरा पर
राम नाम चरितार्थ करने।
केवल राम नाम में
लिख डाला महाकाव्य
समझा दिया मानव को
मानवता का पाठ
दिखा गए विश्व को
मुक्ति का द्वार
हे महान आत्मा
तुम अमरत्व को
हो गये प्राप्त
तुम्हारे रामचरित्र मानस में
सूर के सूरसागर में
अथाह ज्ञान का भंडार
तुम चरितार्थ कर गये
त्रेता व द्वापर युग को
मैं उलझ गई।
कैसे समझाऊं बच्चों को
तुलसी की रामायण
सूर का सूरसागर
सब यंत्र चलित
हो गये कलयुग में
सब भाग रहे
एक दूसरे की होड़ में
धन वैभव का जोश
राम नाम का न होश
कैसे करुं तुम्हारा मान।
अन्दर से क्षुब्ध हूँ व्यथित हूँ
कैसे करूँ गुणगान।
बच्चे राह भटक रहे
चकाचौंध में उलझ रहे
कैसे इनको समझाऊं
कोई ध्येय इन्हें बताऊ.
बीज शाश्वत का जो बो गए
इनके अन्दर पनपाऊं
हे महान आत्मा
तब समझ परिपूर्ण
मान तुम्हारा
हे तुलसी शत -शत बार नमन हमारा